अध्याय 3 वहाँ कुछ गड़बड़ है

[मिस्टर विलियम्स का इस औरत के साथ ज़रूर कुछ चल रहा है!]

[उसने कभी किसी को ऐसे देखा है? कभी नहीं!]

[मिस विल्सन की तरफ़ से कोई खबर? उस रहस्यमयी औरत का चेहरा देखने के लिए मैं बेचैन हूँ!]

उधर, एलेन इंटरव्यू के लिए आए रिज़्यूमे का एक पुलिंदा उलट-पलट रही थी। उसके चेहरे पर झुंझलाहट साफ़ झलक रही थी—कि तभी एक प्रोफ़ाइल पर उसकी नज़र ठहर गई।

उसके हावभाव पल भर में बदल गए।

ठीक उसी वक्त ऑफिस का फोन बज उठा। थोड़ी-सी बात के बाद, उसकी असिस्टेंट ने बताया कि रोनाल्ड अब तक कंपनी नहीं पहुँचा था।

एलेन ने जीभ चटकारी। “मेरे बिना मीटिंग शुरू कर दो। मैं उसे ढूँढ़कर लाती हूँ।”

उसके केबिन में, वह बिना खटखटाए दरवाज़ा धकेलकर अंदर घुस गई। “कल रात कहाँ गायब हो गए थे?”

कज़िन भी थे और साथ काम भी करते थे, इसलिए औपचारिकता की कोई ज़रूरत नहीं थी।

उसने जवाब देने की भी ज़हमत नहीं उठाई। “कुछ चाहिए?”

एलेन का पारा चढ़ गया। “मीटिंग! सेक्रेटरी न भी हो, तो कम-से-कम समय तो पता होना चाहिए। और तुम्हारा फोन—बंद था?”

नज़रें नीचे किए, उसने शांत स्वर में कहा, “सॉरी। कल रात बैटरी खत्म हो गई थी। नया सेक्रेटरी ढूँढ़ने का क्या चल रहा है?”

उसकी पिछली सेक्रेटरी तीन साल तक यह बेवकूफी भरा वहम पाले रही कि वह उसकी पत्नी बन सकती है। उसने खूब तमाशा खड़ा किया था।

तब से उसने नया सेक्रेटरी रखने से साफ़ इनकार कर दिया था।

इसलिए अब उसका यूँ खुद बात छेड़ना एलेन को चौंका गया। “तुम्हारे दिमाग में कोई है?”

उसकी नज़र एलेन के हाथ में मौजूद रिज़्यूमे पर जा टिकी। एक नाम तुरंत अलग दिखा। “नई लड़की चलेगी।”

नई लड़की?

एलेन ने नीचे देखा और वह फाइलें उसकी तरफ़ बढ़ा दीं। “कैंडिडेट्स सब काफ़ी काबिल हैं, लेकिन किसी ने सेक्रेटरी पोस्ट के लिए अप्लाई नहीं किया है।”

सबसे ऊपर वाला रिज़्यूमे एडेलीन का था।

कल जो उसने देखा था—और अब यह अचानक दिलचस्पी—कुछ तो गड़बड़ लग रही थी। उसने पन्ने यूँ ही सरसरी तौर पर देखे, और उंगली एक नाम पर हल्का-सा थिरकती रही।

“एडेलीन। दिलचस्प।”

और बिना कुछ कहे, वह उठकर बाहर चला गया।

पीछे रह गई एलेन ने आँखें सिकोड़ लीं। कल उसने उस औरत को जिस तरह देखा था, वही शक़ पैदा करने के लिए काफी था। और अब ये? क्या वह इतनी जल्दी कदम बढ़ाने वाला था?

उधर, एडेलीन की घबराहट बढ़ती जा रही थी जब उसे ऊपर वाली मंज़िल तक ले जाया गया।

एचआर का स्टाफ दरवाज़े पर रुककर जल्दी से अलविदा बुदबुदाया और फौरन वहाँ से निकल गया।

यह मंज़िल आम कर्मचारियों के लिए सख़्त मना थी।

यह सिर्फ़ कंपनी के दो बड़े मुखियाओं की थी।

बुलावा आए बिना यहाँ कोई आता ही नहीं था।

फोन कसकर पकड़ते हुए वह हिचकी—कुछ भी गड़बड़ होती तो तुरंत किसी को कॉल करने के लिए तैयार।

“एडेलीन, अंदर आओ।” एक खुशमिज़ाज आवाज़ ने उस तनाव को तोड़ दिया।

ऊपर देखते ही वह पल भर के लिए जम गई। “तुम?”

“दुनिया कितनी छोटी है, है ना? आओ, अंदर।” उस गर्मजोशी भरी मुस्कान ने उसकी घबराहट थोड़ी कम कर दी।

कल रात तो बस एक-रात की बात थी। शायद वह उसका ज़िक्र नहीं करेगा।

उसे नहीं पता था कि इन दोनों का आपस में क्या रिश्ता है, लेकिन चेहरों की समानता नज़रअंदाज़ करना मुश्किल था। शायद रिश्तेदार हों।

पर उसे जो उम्मीद बिल्कुल नहीं थी—

—वह था, एग्ज़ीक्यूटिव सेक्रेटरी की नौकरी का ऑफर।

“सॉरी, मैंने तो डिज़ाइन की पोस्ट के लिए अप्लाई किया था,” उसने दृढ़ता से कहा। “और मैंने कभी सेक्रेटरी का काम नहीं किया। मुझे नहीं लगता मैं इसके लायक हूँ।”

“मैंने तुम्हारा रिज़्यूमे देखा है। तुम पूरी तरह काबिल हो,” सामने से शांत जवाब आया। “और मिस्टर विलियम्स तुमसे काफ़ी संतुष्ट हैं।”

“मिस्टर विलियम्स?” उसके चेहरे पर उलझन तैर गई। वह उस नाम के किसी आदमी को नहीं जानती थी।

वह बस कंधे उचका कर रह गया। “फैसला उनका है। मगर चिंता मत करो—स्टार्टिंग सैलरी सीनियर लेवल पर होगी। जूनियर डिज़ाइनर की तनख्वाह से चार गुना।”

“क्या?” उसकी आँखें हैरानी से फैल गईं।

चार बार? इस रफ़्तार से तो आर्थिक आज़ादी में ज़्यादा वक्त लगेगा ही नहीं।

“और आप डिज़ाइन प्रोजेक्ट्स में भी हिस्सा ले सकती हैं, कमीशन के साथ।”

ऑफ़र लुभावना था—लगभग ज़रूरत से ज़्यादा लुभावना।

फिर भी उसने सिर हिला दिया। “माफ़ कीजिए, मैं—”

“पहले उससे मिल तो लीजिए।”

वह वाक्य पूरा भी नहीं कर पाई थी कि उसे पहले ही सीईओ के केबिन की ओर खींच लिया गया।

जैसे ही वे दरवाज़े तक पहुँचे—

धड़ाम!

अंदर से काँच टूटने की तीखी आवाज़ गूँज उठी।

उसका दिल उछल पड़ा।

तो बात ये थी। तभी तो तनख़्वाह इतनी ज़्यादा थी—कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ ज़रूर थी।

वह भाग जाए? या पहले किसी को ढेर कर दे?

वह तय कर ही रही थी कि दरवाज़ा झटके से खुल गया।

“एडेलिन, अभी तुरंत शुरू करो। गाड़ी तैयार करवाओ। हम वैलर ऑक्शन्स जा रहे हैं।”

उस ठंडी आवाज़ में इनकार की कोई गुंजाइश नहीं थी।

“क्या? मैं?”

वह सन्न रह गई, उसकी आवाज़ काँप रही थी।

वह… सीईओ था?

उसका वन-नाइट स्टैंड… उसका बॉस?

उसकी नज़र हल्की-सी नीचे झुकी—उसके चेहरे पर फैली घबराहट और गर्दन पर पड़े हल्के निशानों पर टिक गई।

एक पल का ठहराव।

खामोशी देख, एलेन आगे बढ़कर समझाने लगी। “आज का मुख्य आकर्षण क्वीन वैलोरियन बारहवीं का नीलम हार है। वही हमारा टारगेट एक्विज़िशन है।”

“नेब्युला’ज़ हार्ट?” उसकी आँखें तुरंत चमक उठीं।

इस नीलामी की महीनों से चर्चा हो रही थी। शाही गहनों का डिज़ाइन उसके शोध-प्रबंध का मुख्य विषय था।

इतने दंतकथाओं जैसे पीस को इतनी नज़दीक से देखने का मौका—उसने संभावित ख़तरों और परेशानियों की सारी सोच पल भर में भुला दी।

वह तेज़ी से लिफ़्ट की ओर बढ़ी, फिर अचानक रुककर पलटी और झेंपते हुए बोली, “मिस्टर विलियम्स, मुझे ड्राइविंग नहीं आती।”

“मैं चलाऊँगा। चलिए।” वह बिना हिचक उसके पास से निकल गया।

उनके पीछे एलेन आँखें फैलाए देखती रह गई। उसके दिमाग़ में बस एक ही बात गूँज रही थी—कुछ तो ज़रूर चल रहा है।

वे चले गए तो वह वहीं खड़ी रही, जब तक उसकी असिस्टेंट पास नहीं आई। “मिस विल्सन, सब ठीक है?”

“उस औरत के बारे में मुझे सब कुछ चाहिए। सब कुछ।”

उसकी मुट्ठियाँ हल्के से भींच गईं।

क्या… ‘आइस किंग’ आखिरकार पिघल रहा था?

कार में, एडेलिन पैसेंजर सीट पर बेचैनी से करवट बदलती रही।

नौकरी का पहला दिन—और सीईओ खुद उसे ड्राइव करके ले जा रहा है?

कौन यकीन करेगा?

और उससे भी ज़्यादा डरावनी बात ये थी कि उसका बॉस… वही उसका वन-नाइट स्टैंड था।

शरीर में बची हुई टीस ने माहौल और भी अटपटा कर दिया।

कनपटी मसलते हुए उसे लगा जैसे सब कुछ पूरी तरह पागलपन बन चुका है।

कुछ देर बाद उसने संभलकर कहा, “मिस्टर विलियम्स, कल रात के बारे में… वो एक गलतफ़हमी थी।”

शांत जवाब आया। “मुझे माफ़ी माँगनी चाहिए। मुझे पता नहीं था कि ये आपका पहली बार था। उम्मीद है मैंने आपको चोट नहीं पहुँचाई।”

उसका चेहरा पल भर में लाल हो गया।

वह नज़रें सड़क पर टिकाए रहा, आवाज़ कुछ नरम पड़ गई थी।

ऑफ़िस जाते हुए उसने सब सोचा था। उसका व्यवहार—जोश से भरा, लेकिन अनुभवहीन—सब कुछ पहले ही साफ़ कर चुका था।

और बाकी सब ने उस पर मुहर लगा दी थी।

उसने मुँह खोला, इनकार करने ही वाली थी—

—कि कार अचानक मुड़ गई।

“मिस्टर विलियम्स, हमें तो यहाँ से सीधे जाना चाहिए,” उसने नेविगेशन पर नज़र डालते हुए धीमे से कहा।

“मैं पहले तुम्हें अस्पताल ले जा रहा हूँ।”

उस हल्की-सी बात ने उसके भीतर घबराहट की लहर दौड़ा दी।

अस्पताल?

क्या वह उसकी हालत चेक कर रहा था? किसी बात का शक कर रहा था? या उससे भी बदतर—सोच रहा था कि वह उसे फँसाने की कोशिश करेगी?

उसके विचार बेकाबू होने लगे। “मिस्टर विलियम्स, मैंने कल कहा था—”

“कि तुम मुझसे कोई ज़िम्मेदारी नहीं चाहती।” कार सड़क किनारे रुक गई। पेड़ों की परछाइयाँ उसके चेहरे पर पड़ रही थीं, उसका हावभाव छिप गया।

एक पल का सन्नाटा। फिर, बहुत धीमे—

“तो… तुम्हारा इरादा ज़िम्मेदारी लेने का नहीं है?”

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